आज बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने चितौड़गढ़ में सत्संग व नामदान दिया। बड़ी भारी गर्मी और लू के बीच अपने काफिले के साथ बाबा जी अपने आध्यात्मिक अभियान की ओर लगातार बढ़ रहे हैं। अपने संदेश में बाबा जी ने कहा कि बच्चों! आज समय बड़ा कठिन है। यह समय जो आपको मिला है वह बड़े सौभाग्य से मिला है। आपको चाहिऐ कि आप इस समय का सदुपयोग कर लो और जगे हुऐ महापुरूष की खोज करके उनसे अपने घर को जाने का रास्ता लेकर भजन कर लो और चढ़ चलो ऊंचे आकाश में जहां से जीवात्मा नीचे देखती है तो उसे वास्तविकता का ज्ञान हो जाता है कि यहां कोई अपना नहीं है। सब एक-दूसरे के साथ बंधे हैं कर्मों के बन्धन में और अपने-अपने कर्मों का भुगतान कर रहे हैं। यही सच्चाई है जो यहां से मालूम नहीं पड़ती है। जब जीवात्मा भजन-ध्यान के द्वारा इस पंच भौतिक तत्वों के शरीर को छोड़कर निकलती है और ऊंचे रूहानी मार्ग की ओर चलती है तो उसे इसका ज्ञान होता है कि यहां मृत्युलोक में सांसारिक भोगों के पीछे जीव पड़ा है और उसे किसी भी बात का भान नहीं है। वह यहां के सुखों को, यहां के भोगों को, यहां के मिलने’-जुलने को, यहां के रिश्ते-नातों को ही अपना समझने लगा है और इसीलिए ही अब जीव दुखों से
घिर गया है। उसे कोई रास्ता नहीं नजर आ रहा है कि कैसे इसमें से निकले।
यह मनुष्य शरीर आपको बड़े ही भाग्य से मिल गया है। इसकी कद्र करो और इस पर रहम करो। यह तन अब दोबारा मिलने वाला नहीं है। आप इसके रहते आपनी आत्मा का, अपनी रूह का कल्याण करा लो। इसके लिए आपको महात्माओं की शरण में जाना होगा। आपके सभी दुखों की दवा महात्माओं के पास है। उनकी शरण में जाओ और उनसे रास्ता पूछो, समाधान पूछो तो वे बताऐंगे और आपकी दुविधा और अज्ञानता को दूर कर देंगे।
सत्संग और नामदान के बाद बाबा जयगुरूदेव जी महाराज अपने काफिले के साथ बड़ी सदरी, जिला चितौड़गढ़ की ओर चले गऐ। आज का रात्रि विश्राम वहीं होगा और कल प्रातः सत्संग और नामदान की मौज बाबा जी ने की है।

बिना शब्द मन वश नहीं

मथुरा 17 दिसम्बर 1972 को भण्डारे के अवसर पर बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने सत्संग सुनाते हुऐ कहा कि मालिक तुम्हें हमेशा याद करता रहता है। जो मालिक को याद करते रहते हैं वे नाम धन जमा करते रहते हैं। इसको जमा करने के संबंध में महात्माओं ने कितनी किताबें लिख दीं। अगर तुम अपनी जीवात्मा की रक्षा करना चाहते हो, अपना जीव कल्याण करना चाहते हो तो यह तुम्हारे लिए शुभ अवसर है। यह मनुष्य शरीर एक दरवाजा है जिसमें से होकर परमात्मा की तरफ जाने का मार्ग है। कर्मों का फल अवश्य मिलेगा। अच्छा करोगे तो अच्छा मिलेगा और बुरा करोगे तो बुरा मिलेगा। तो मुनष्य शरीर अच्छे कर्मों को करने के लिए मिला था।
पचो मत आय इस जग में,

जानियो रैन का सुपना।।
बुल्ला शाह एक फकीर थे, खेतों में काम कर रहे थे। कुछ लोग उनके पास गऐ और पूछा कि महाराज जी परमात्मा कितनी देर में मिलता है? बुल्ला शाह ने एक पौधे को बैठे-बैठे एक जगह से उखाड़ा और दूसरी जगह लगा दिया और बोले कि भगवान इतनी देर में ही मिलता है। तुम अपने ध्यान को दुनियां से हटाकर उधर लगा दो फिर परमात्मा उधर खड़ा है।
गांव वाले चाहते थे कि मेरे गांव में न आऐं मगर तुम्हारे भगाने से, सत्कार और बचनों से बड़ा असर पड़ा है। जब माता-पिता बुरा करेंगे तो बच्चों पर असर होगा और बच्चे बुरे होंगे। करोड़ों बच्चों पर आज अच्छा संस्कार पड़ रहा है। उठना, बैठना, प्रणाम करना सब कुछ देखते हैं तो संस्कार तो पड़ ही रहा है। तुम जल्दी सुधर जाओ फिर महात्माओं के उठाने मंे क्या देर लगती है। बहुत दिन हुऐ गुजरात से एक आदमी आये हुऐ थे। जमुना जी के किनारे बैठकर राम नाम का जाप कर रहे थे। थोड़ी देर बाद ‘एक आना’, ‘दो आना’, ‘तीन आना’ उनका जाप चलने लगा। मैंने उनसे पूछा कि यह क्या करने लगे ? तो इस प्रकार का सुमिरन होता है। मन की गति भजन में मालूम होती है कि यह कितना भागता है। इसको किसी तरह से रोकना है। दुनियां की कोई ताकत इसे वश में नहीं कर सकती है। यह तभी वश में आऐगा जब नाम या शब्द या आवाज सुनने को मिलेगी। आकाशवाणी, वेदवाणी, कलमा, जब इसको सुनने को मिलेगा तभी यह वश मंे आ सकता है। नाम को पाकर के यह ठहर जाऐगा और शांत हो जाऐगा। नाम न तीरथ में है, न तप मंे हैं, न मन्दिर में है, न मस्जिद में है। यह तो महात्माओं के पास मिलेगा। उन्हीं के पास उसकी कुंजी है।
तो जब तक सतगुरू नहीं मिलेंगे तब तक चौरासी नहीं छूटेगी। वहां तुम्हें जाना होगा क्योंकि तुमने कर्म ही ऐसे किऐ हैं। पुस्तकों में लिखा है कि गुरू ज्ञान वाला हो, उसकी दिव्य आंख खुली हो, परमात्मा के पास आता-जाता हो वही तुम्हें नाम के साथ जोड़ सकता है। अब तक लोग ऐसे गुरू की जरूरत नहीं समझते थे मगर कोई बात नहीं अब लोग जरूरत समझने लगे हैं। ऐसे गुरू को तुम दिल में बसा लो, उसकी मूरत को पक्का कर लो फिर क्या देर लगती है।
गउओं को कटना कौन बन्द करेगा? जयगुरूदेव। जीवों का कल्याण किससे होगा ? जयगुरूदेव। मांस-मछली, अण्डे की दुकान कौन बन्द करायेगा ? जयगुरूदेव। जयगुरूदेव नाम किसका ? परमात्मा का।
ये नारे जब भण्डारे के अवसर पर लाखों नर-नारियों से लगवाये जा रहे थे तो इनके हाथों को उठते हुऐ देखकर जयगुरूदेव बाबा ने कहा कि ये हाथ तलवार की तरह चल रहे हैं मानों शिवाजी, राणाप्रताप की तलवार हो। इसी क्रम में बाबा जी ने कहा कि भविष्य में हिन्दुस्तान की जितनी भी रिवाल्वर और बन्दूकें हैं सबकी सब खजाने में जमा करा दी जाऐंगी। डाकू-बदमाश नहीं रहेंगे। अधिकारियों को भी सुविधा हो जाऐगी। बाबा जी ने आगे कहा कि तुम लोगों की
प्रार्थनाऐं भगवान के दरबार में पहुंच गई हैं और मेरा विश्वास है कि सभी मंजूर हो जाऐंगी।

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